81 कर्मचारियों के हक़ में ठोक दिया था ताला जब नेगी के तेवरों के आगे झुक गई थी सरकार !

81 कर्मचारियों के हक़ में ठोक दिया था ताला – जब नेगी के तेवरों के आगे झुक गई थी सरकार !

देहरादून। साल 2010 का वो वाकया आज भी लोगों की जुबान पर है, जब गढ़वाल मंडल विकास निगम (GMVN) के तत्कालीन उपाध्यक्ष और राज्य मंत्री रघुनाथ सिंह नेगी ने कर्मचारियों के हक़ में ऐसा कदम उठाया था, जिसने सरकार और निगम प्रबंधन — दोनों को हिला कर रख दिया था।

निगम प्रबंधन ने निकाले थे 81 कर्मचारी:
उस वक्त निगम प्रबंधन ने 81 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को यह कहकर बाहर का रास्ता दिखा दिया था कि “अब आपकी सेवाओं की आवश्यकता नहीं है।” यह खबर जब उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी के पास पहुंची तो उन्होंने तात्कालिक रूप से मोर्चा संभाल लिया।

ठोक दिया था एमडी कक्ष में ताला!
कर्मचारियों के साथ हुए अन्याय से आक्रोशित नेगी सीधे एमडी के कक्ष में पहुंचे और वहां ताला ठोक दिया! उन्होंने साफ शब्दों में कहा — “जब तक सभी कर्मचारियों को पुनः सेवा में नहीं लिया जाएगा, तब तक कोई दफ्तर नहीं खुलेगा!”

सरकार को लेना पड़ा एक्शन:
मामला तत्कालीन मुख्यमंत्री के संज्ञान में पहुंचा। नेगी ने दो-टूक कहा कि “या तो कर्मचारियों की बहाली कीजिए, या मेरा इस्तीफा स्वीकार कीजिए।” नेगी के इस सख्त रुख़ के बाद सरकार को झुकना पड़ा — 48 घंटे के भीतर एमडी को हटा दिया गया और सभी 81 कर्मचारियों की सेवाएँ बहाल कर दी गईं।

नेगी बोले – “मोर्चा किसी का भी उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं करेगा”
नेगी ने साफ कहा कि जनसंघर्ष मोर्चा का मूल मंत्र ही अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाना है। चाहे सामने सरकार हो या सिस्टम, कर्मचारियों के अधिकारों की लड़ाई मोर्चा हर हाल में लड़ेगा।