ओवरलोड चालान पर परिवहन विभाग का भेदभावपूर्ण रवैया बर्दाश्त नहीं — जन संघर्ष मोर्चा
“छोटे वाहनों पर कार्रवाई, बड़े ट्रकों से विभाग का याराना!”**
विकासनगर। (उत्तराखंड बोल रहा है)जनपद देहरादून में परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए जन संघर्ष मोर्चा ने विभाग के खिलाफ तीखा विरोध दर्ज कराया है।
मोर्चा के जिला मीडिया प्रभारी प्रवीण शर्मा पिन्नी ने विभाग पर आरोप लगाया कि वह ओवरलोडिंग के नाम पर केवल छोटे चार पहिया माल वाहक वाहनों का शोषण कर रहा है, जबकि बड़े और भारी वाहन खुलेआम क्षमता से कई गुना अधिक माल ढो रहे हैं, फिर भी विभाग उन पर कार्रवाई से बचता है।
1–2 कुंतल बढ़ा माल भी बर्दाश्त नहीं, लेकिन 20–25 टन ओवरलोड देखकर भी आंखें मूंद लेता विभाग!
मोर्चा ने आरोप लगाया कि छोटे वाहन चालक यदि एक–आध कुंतल भी अधिक माल लाद दें, तो विभाग तुरंत चालान थमा देता है।
इसके उलट 9 टन व इससे अधिक क्षमता वाले वाहन अपनी क्षमता से ढाई गुना अधिक माल ढोते हैं, लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं की जाती।
मोर्चा ने यह रवैया सीधे–सीधे भेदभावपूर्ण और पक्षपातपूर्ण बताया।
मंदी के दौर में छोटे वाहन चालकों पर डंडा चलाना अमानवीय: मोर्चा
मोर्चा के अनुसार आज आर्थिक मंदी ने छोटे वाहन मालिकों व चालक परिवारों की कमर तोड़ रखी है।
कई दिनों की मेहनत के बाद वे 2–4 हजार रुपए बड़ी मुश्किल से कमा पाते हैं।
लेकिन विभाग का एक चालान ही कई हजार रुपए का होता है, जिससे पूरा परिवार आर्थिक संकट में डूब जाता है।
मोर्चा ने कहा कि विभाग को कानून के साथ-साथ मानवीय दृष्टिकोण भी अपनाना चाहिए। हर गलती को अपराध की तरह नहीं देखा जाना चाहिए, विशेषकर तब जब बड़े वाहनों को विशेष छूट दी जा रही हो।
“बड़े वाहनों से याराना, छोटे वाहन वालों से बेइंसाफी”—मोर्चा का आरोप
मोर्चा ने कहा कि बड़े ट्रक ऑपरेटरों से विभाग का मेल–जोल और निजी हित इतने गहरे हो गए हैं कि वे भारी ओवरलोड देखकर भी कार्रवाई से बचते रहते हैं।
वहीं छोटे वाहन चालकों को चुन–चुनकर निशाना बनाया जाता है, जो कि बेहद अनुचित और गैरकानूनी रवैया है।
मोर्चा की चेतावनी: जल्द सुधार नहीं हुआ तो शासन तक जाएगी आवाज़
मोर्चा ने परिवहन विभाग को स्पष्ट चेतावनी दी है—
“यदि इस भेदभावपूर्ण रवैये पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई,
तो मोर्चा शासन स्तर पर दस्तक देगा और आंदोलन का रास्ता अपनाने से भी पीछे नहीं हटेगा।”
जन संघर्ष मोर्चा के इस बयान ने परिवहन विभाग की कार्यशैली को एक बार फिर कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना यह है कि विभाग छोटे माल वाहक वाहन चालकों की पीड़ा समझकर सुधारात्मक कदम उठाता है या नहीं।
