संस्कारों से सशक्त होगा राष्ट्र, आर्य समाज की संस्कारशाला का भव्य समापन

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संस्कारों से सशक्त होगा राष्ट्र, आर्य समाज की संस्कारशाला का भव्य समापन

सप्ताह भर बच्चों ने सीखे वैदिक ज्ञान, योग, संगीत और नैतिक जीवन के पाठ
(उत्तराखंड बोल रहा है)
विकासनगर। आर्य समाज विकासनगर द्वारा आयोजित सप्ताहव्यापी संस्कारशाला का रविवार को हर्षोल्लास और वैदिक वातावरण के बीच भव्य समापन हुआ। संस्कारशाला में नगर के बड़ी संख्या में बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और वैदिक परंपराओं का ज्ञान अर्जित किया।
समापन समारोह में वक्ताओं ने कहा कि “सुदृढ़ राष्ट्र की नींव संस्कारवान पीढ़ी पर ही टिकी होती है।” बच्चों को दिए गए नैतिक संस्कार और चरित्र निर्माण के सूत्र उनके भविष्य के जीवन में मजबूत आधार साबित होंगे।
संस्कारशाला के दौरान बच्चों ने नियमित स्कूली शिक्षा से अलग हटकर वैदिक मंत्रोच्चारण, योग, नृत्य, कला, संगीत, स्वास्थ्य जागरूकता तथा पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों का प्रशिक्षण प्राप्त किया। साथ ही उन्होंने भारत की वीर नारियों, रामायण और महाभारत के महान पात्रों के जीवन से प्रेरणा ली।
पूरे सप्ताह बच्चों का उत्साह देखते ही बनता था। अभिभावकों ने भी बढ़-चढ़कर सहभागिता करते हुए अपने बच्चों को संस्कारशाला में भेजने के लिए प्रेरित किया। आर्य समाज मंदिर के पुरोहित चंदन शास्त्री ने विशेष वैदिक मंत्रों के साथ यज्ञ सम्पन्न कराया तथा एक दंपति से यज्ञ में आहुतियां दिलवाईं।
इस अवसर पर सनातन संस्कृति में वर्णित 16 संस्कारों के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान शिशु के मानसिक विकास एवं माता को मानसिक बल प्रदान करने के उद्देश्य से सीमन्तोन्नयन संस्कार किया जाता है, जो वर्तमान समय में “बेबी शॉवर” के रूप में लोकप्रिय हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि जीवन को इन 16 संस्कारों से सुसज्जित किया जाए तो मनुष्य का जीवन सार्थक और आदर्श बन सकता है।
संस्कारशाला के सफल संचालन में डॉ. प्रवेश गुप्ता, नरेंद्र वर्मा, कामाक्षी गुप्ता, डॉ. प्रतिभा प्रकाश, आरती बंसल, सुषमा तोमर, सोनिका वालिया, मीनू वर्मा और कौमुदी वर्मा का विशेष सहयोग रहा।
समारोह में वरिष्ठ सदस्य दयानंद तिवारी, विवेक कुमार, विजेंद्र सैनी, दीपक बंसल, रमन ढंग, तजेंद्र धीमान, ईश्वर मेहंदीरट्टा, सावित्री राणा सहित बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे।
समापन अवसर पर बच्चों ने अगले वर्ष भी ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान संस्कारशाला आयोजित करने की जोरदार मांग रखी। आर्य समाज के पदाधिकारियों ने आश्वस्त किया कि समाज और राष्ट्र के उत्थान के लिए भविष्य में भी इस प्रकार की संस्कारमूलक कार्यशालाओं का आयोजन निरंतर किया जाता रहेगा।
“संस्कारवान बालक ही सशक्त समाज और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण करते हैं” — इसी संदेश के साथ संस्कारशाला का समापन हुआ।