आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के शोषण पर गरजा जन संघर्ष मोर्चा, पे-स्लिप और ईपीएफ में पारदर्शिता की मांग

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आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के शोषण पर गरजा जन संघर्ष मोर्चा, पे-स्लिप और ईपीएफ में पारदर्शिता की मांग
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विकासनगर। प्रदेश के सरकारी विभागों और निगमों में प्राइवेट आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों के कथित शोषण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। जन संघर्ष मोर्चा ने एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन का संकेत दिया है।
जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएनवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने पत्रकारों से वार्ता में कहा कि प्रदेशभर में आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से कार्यरत हजारों कर्मचारियों को नियमित रूप से पे-स्लिप उपलब्ध नहीं कराई जा रही है, जो श्रम अधिकारों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि अधिकांश कर्मचारियों को यह तक नहीं पता कि सरकार द्वारा उनके लिए कितना वेतन स्वीकृत किया गया है और एजेंसियां उनके वेतन से किस आधार पर कटौती कर रही हैं।
नेगी ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के वेतन से ईपीएफ और अन्य मदों में कटौती की जा रही है, लेकिन कर्मचारियों को न तो उनका ईपीएफ नंबर बताया जाता है और न ही यह स्पष्ट किया जाता है कि कटौती की गई राशि वास्तव में जमा हो रही है या नहीं। इससे कर्मचारियों के भविष्य और सामाजिक सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग सहित विभिन्न सरकारी संस्थानों में कार्यरत प्रवक्ता, बीआरपी, सीआरपी और अन्य कार्मिक लंबे समय से इस व्यवस्था की खामियों का खामियाजा भुगत रहे हैं। सरकार द्वारा निर्धारित वेतन और कर्मचारियों को मिलने वाले वास्तविक भुगतान के बीच बड़े अंतर की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
मोर्चा अध्यक्ष ने सरकार और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जनता द्वारा चुने गए विधायक कर्मचारियों की समस्याओं पर मौन क्यों हैं। यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हजारों कर्मचारियों का भविष्य संकट में पड़ सकता है।
जन संघर्ष मोर्चा ने स्पष्ट किया कि वह कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए जल्द ही शासन स्तर पर मामला उठाएगा और आवश्यक होने पर व्यापक जनआंदोलन भी चलाया जाएगा।
पत्रकार वार्ता में मोर्चा के अध्यक्ष अमित जैन तथा भीम सिंह बिष्ट भी उपस्थित रहे।
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