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बीआरपी-सीआरपी कार्मिकों के शोषण का मुद्दा उठा, जन संघर्ष मोर्चा ने मंत्री धन सिंह रावत पर साधा निशाना
(उत्तराखंड बोल रहा है)
विकासनगर। जन संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने प्रदेश में समग्र शिक्षा अभियान के तहत कार्यरत बीआरपी और सीआरपी कार्मिकों के कथित शोषण का मुद्दा उठाते हुए सरकार और शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी आउटसोर्सिंग एजेंसियां कर्मचारियों के वेतन में भारी कटौती कर रही हैं, जबकि इस पूरे मामले में मंत्री स्तर पर कोई प्रभावी निगरानी नहीं हो रही है।
पत्रकार वार्ता में नेगी ने कहा कि प्रदेश भर में करीब 950 बीआरपी-सीआरपी कार्मिक कार्यरत हैं, लेकिन उन्हें निर्धारित वेतन, कटौतियों और अन्य वित्तीय मानकों की स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों को पे-स्लिप तक उपलब्ध नहीं कराई जाती, जिससे वे यह जानने में असमर्थ हैं कि उनके वेतन से किस मद में कितनी राशि काटी जा रही है।
मोर्चा अध्यक्ष ने कहा कि आउटसोर्सिंग एजेंसियों द्वारा ईपीएफ और कमीशन के नाम पर कटौती की जा रही है, लेकिन अधिकांश कर्मचारियों को अपने ईपीएफ नंबर और जमा होने वाली राशि की जानकारी तक नहीं है। उन्होंने इसे कर्मचारियों के अधिकारों का हनन बताते हुए सरकार से पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग की।
रघुनाथ सिंह नेगी ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के हितों की अनदेखी की जा रही है और शिक्षा मंत्री अपने विभागों के कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान में विफल रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो जन संघर्ष मोर्चा प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेगा।
मोर्चा ने मुख्यमंत्री से मांग की कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। साथ ही, मंत्री डॉ. धन सिंह रावत की कार्यशैली की समीक्षा करने की भी मांग की गई।
इस दौरान पत्रकार वार्ता में दिलबाग सिंह और मोर्चा अध्यक्ष अमित जैन भी उपस्थित रहे।