कमीशनखोरी के आरोपों के बीच आंगनबाड़ी वर्कर्स को बांटे गए सूट-साड़ियों पर उठा विवाद, मोर्चा ने की जांच की मांग

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कमीशनखोरी के आरोपों के बीच आंगनबाड़ी वर्कर्स को बांटे गए सूट-साड़ियों पर उठा विवाद, मोर्चा ने की जांच की मांग

(उत्तराखंड बोल रहा है)
विकासनगर। जन संघर्ष मोर्चा ने महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए खरीदे गए सूट और साड़ियों की गुणवत्ता तथा खरीद प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मोर्चा ने आरोप लगाया कि कमीशनखोरी के चलते निम्न गुणवत्ता के वस्त्र ऊंची कीमतों पर खरीदे गए और उन्हें आंगनबाड़ी वर्कर्स को वितरित किया गया।

मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने पत्रकार वार्ता में कहा कि गत वर्ष विभाग की ओर से लगभग 29,005 साड़ियों और 35,931 सूटों की खरीद की गई थी। उनके अनुसार, इनकी गुणवत्ता इतनी खराब है कि अधिकांश आंगनबाड़ी कार्यकर्ता इन्हें पहनना पसंद नहीं करतीं और बड़ी संख्या में ये सामग्री उपयोग में आने के बजाय पड़ी हुई है।

नेगी ने आरोप लगाया कि विभाग द्वारा प्रति साड़ी लगभग 495 रुपये तथा प्रति सूट लगभग 496 रुपये की दर से खरीद की गई, जबकि इसी प्रकार के उत्पाद खुले बाजार में 250 से 300 रुपये के बीच आसानी से उपलब्ध हो सकते हैं। उन्होंने खरीद प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने और कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय करने की मांग की।

मोर्चा ने यह भी मांग की कि भविष्य में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को वस्त्र उपलब्ध कराने के बजाय डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से उनके बैंक खातों में राशि भेजी जाए, ताकि वे अपनी आवश्यकता और पसंद के अनुसार वस्त्र खरीद सकें।

पत्रकार वार्ता में हाजी असद और सुशील भारद्वाज भी उपस्थित रहे।

वहीं, इस संबंध में विभाग या मंत्री पक्ष की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि सरकार या संबंधित विभाग की ओर से कोई स्पष्टीकरण जारी किया जाता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।