सीलिंग भूमि के नाम पर आमजन को न किया जाए परेशान, मोर्चा ने डीएम के सामने उठाई आवाज
(उत्तराखंड बोल रहा है)
देहरादून। सीलिंग भूमि यानी चाय बागान भूमि के नाम पर आम लोगों के उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए जन संघर्ष मोर्चा ने जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के समक्ष पीड़ितों का मुद्दा उठाया। मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। डीएम ने मामले में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) और उपजिलाधिकारी विकासनगर को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
नेगी ने कहा कि देहरादून जिले के कई क्षेत्रों में सीलिंग भूमि के नाम पर भवन स्वामियों और काश्तकारों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 10 अक्टूबर 1975 से पहले खरीदी गई भूमि को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की सही भावना में अनुपालना होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि भूमि की वास्तविक स्थिति, खरीद का वर्ष और दस्तावेजों की जांच किए बिना खरीद-फरोख्त एवं दाखिल-खारिज पर रोक लगाने से ऐसे लोग भी प्रभावित हो रहे हैं, जिनकी भूमि सीलिंग की श्रेणी में नहीं आती। इससे आमजन के साथ अधिवक्ताओं को भी परेशानी हो रही है और सरकार को राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है
मोर्चा ने मांग की कि प्रत्येक मामले में बैनामा, रजिस्ट्री, भूमि की खरीद की तिथि और स्वामित्व की विधिक स्थिति की जांच करने के बाद ही कार्रवाई की जाए। नेगी ने स्पष्ट किया कि यदि कोई भूमि वास्तव में सीलिंग कानून के दायरे में आती है तो प्रशासन नियमानुसार कार्रवाई करे
लेकिन कानून की आड़ में पात्र लोगों का उत्पीड़न किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।
प्रतिनिधिमंडल में हाजी असद, प्रवीण शर्मा पिन्नी और अतुल हांडा मौजूद रहे।

सीलिंग भूमि के नाम पर आमजन को न किया जाए परेशान, मोर्चा ने डीएम के सामने उठाई आवाज