25 हजार के मानदेय पर 100-200 किमी दूर सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षक, अब हक की लड़ाई लड़ेगा जन संघर्ष मोर्चा

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25 हजार के मानदेय पर 100-200 किमी दूर सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षक, अब हक की लड़ाई लड़ेगा जन संघर्ष मोर्चा

ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन अवकाश का भी नहीं मिलता मानदेय, ईपीएफ और ईएसआई जैसी सुविधाओं से भी वंचित; रघुनाथ सिंह नेगी ने सरकार के समक्ष मामला उठाने का किया ऐलान

विकासनगर। प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में वर्षों से सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा अब जन संघर्ष मोर्चा उठाएगा। मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएनवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने शिक्षकों की बदहाल सेवा शर्तों पर सवाल उठाते हुए उनके मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए संघर्ष का ऐलान किया है।
पत्रकारों से बातचीत में नेगी ने कहा कि प्रदेश में करीब 5 हजार अतिथि शिक्षक पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से शिक्षा व्यवस्था को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन विडंबना यह है कि इतने लंबे सेवाकाल के बावजूद उनका भविष्य सुरक्षित नहीं है। वर्तमान में उन्हें मात्र 25 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा है, जो आज की महंगाई के दौर में बेहद अपर्याप्त है।


उन्होंने कहा कि इन शिक्षकों की परेशानियां केवल कम मानदेय तक सीमित नहीं हैं। ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन अवकाश के दौरान भी उन्हें मानदेय नहीं मिलता। वहीं, ईपीएफ और ईएसआई जैसी बुनियादी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से भी वे वंचित हैं। हैरानी की बात यह है कि विभागीय मंत्री द्वारा मानदेय बढ़ाने के निर्देश दिए जाने के बावजूद अब तक धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
नेगी ने कहा कि कई अतिथि शिक्षक अपने घरों से 100 से 200 किलोमीटर दूर दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं। इतनी कठिन परिस्थितियों में काम करने के बावजूद उन्हें न तो पर्याप्त आर्थिक लाभ मिल रहा है और न ही भविष्य की कोई सुरक्षा।


उन्होंने स्पष्ट किया कि जन संघर्ष मोर्चा अतिथि शिक्षकों का मासिक मानदेय कम से कम 40 हजार रुपये करने, ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन अवकाश का मानदेय देने तथा ईपीएफ और ईएसआई जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग को लेकर आवाज बुलंद करेगा। इस पूरे प्रकरण को सरकार के समक्ष मजबूती से उठाया जाएगा।
पत्रकार वार्ता में दिलबाग सिंह एवं प्रवीण शर्मा पिन्नी मौजूद रहे।