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चार ताप विद्युत परियोजनाओं के लिए बॉयलर, टर्बाइन और जनरेटर बनाएगा बीएचईएल, प्रत्येक परियोजना की क्षमता होगी 1,600 मेगावाट
हरिद्वार। भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) के हरिद्वार स्थित संयंत्र के लिए बड़ी उपलब्धि सामने आई है। अडानी पावर लिमिटेड ने देश में चार नई ताप विद्युत परियोजनाओं की स्थापना के लिए बीएचईएल को बड़े अनुबंध सौंपे हैं। इन चारों परियोजनाओं की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता 6,400 मेगावाट होगी। इस अनुबंध के तहत बीएचईएल महत्वपूर्ण विद्युत उत्पादन उपकरणों की आपूर्ति करेगा।
अनुबंध के अनुसार, प्रत्येक ताप विद्युत परियोजना की क्षमता 2×800 मेगावाट यानी 1,600 मेगावाट निर्धारित की गई है। इस प्रकार चारों परियोजनाओं की कुल क्षमता 6,400 मेगावाट होगी। बीएचईएल इन परियोजनाओं के लिए बॉयलर, टर्बाइन, जनरेटर सहित अन्य आवश्यक उपकरणों की आपूर्ति करने के साथ निर्धारित तकनीकी सेवाएं भी उपलब्ध कराएगा।
बीएचईएल को मिले इन अनुबंधों को देश के विद्युत उत्पादन क्षेत्र में कंपनी की तकनीकी दक्षता और विनिर्माण क्षमता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेष रूप से हरिद्वार स्थित बीएचईएल इकाई के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है, जहां विद्युत उत्पादन से जुड़े महत्वपूर्ण उपकरणों का निर्माण किया जाता है।
विद्युत उत्पादन क्षेत्र में बीएचईएल की मजबूत भागीदारी
बीएचईएल देश ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी विद्युत उत्पादन उपकरणों के निर्माण और आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कंपनी के अनुसार, वह दुनिया भर में अब तक 214 गीगावाट से अधिक क्षमता के विद्युत उत्पादन उपकरण स्थापित कर चुकी है।
वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक देश की उपयोगिता स्तर की ताप विद्युत क्षमता में बीएचईएल की हिस्सेदारी 54 प्रतिशत रही। इसके अलावा परमाणु ऊर्जा के द्वितीयक पक्ष में कंपनी की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत और जल विद्युत क्षेत्र में 43 प्रतिशत रही। देश की कुल पारंपरिक विद्युत उत्पादन क्षमता में बीएचईएल का योगदान 53 प्रतिशत बताया गया है।
ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगी मजबूती
बीएचईएल के अनुसार, अडानी पावर से मिले ये अनुबंध कंपनी की तकनीकी क्षमता, गुणवत्तापूर्ण विनिर्माण और बड़े विद्युत संयंत्रों के क्रियान्वयन के अनुभव पर भरोसे को दर्शाते हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से देश की विद्युत उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी और बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
यह उपलब्धि न केवल बीएचईएल के लिए, बल्कि हरिद्वार के औद्योगिक क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे देश के विद्युत उपकरण निर्माण क्षेत्र में स्वदेशी क्षमता और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
