शिक्षा से जीवन उत्थान” का जीवंत उदाहरण सड़कों के बच्चों के जीवन में जगा रहा है उजाला

शिक्षा से जीवन उत्थान” का जीवंत उदाहरण — जिला प्रशासन का आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर सड़कों के बच्चों के जीवन में जगा रहा है उजाला

मुख्यमंत्री की प्रेरणा और जिलाधिकारी सविन बंसल की पहल से शिक्षा की मुख्यधारा में लौट रहे हैं भिक्षावृत्ति व बालश्रम से मुक्त बच्चे

देहरादून। (उत्तराखंड बोल रहा है) जिला प्रशासन देहरादून द्वारा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्रेरणा से शुरू की गई पहल “शिक्षा से जीवन उत्थान” अब सड़कों पर जीवन गुजारने वाले बच्चों के जीवन में नई रोशनी बनकर उभरी है। प्रशासन द्वारा स्थापित राज्य का पहला आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर चाइल्ड-फ्रेंडली वातावरण, विशेषज्ञ शिक्षकों और समग्र विकास पर आधारित गतिविधियों के माध्यम से इन बच्चों को शिक्षा की राह दिखा रहा है।

जिलाधिकारी सविन बंसल के विजन और निरंतर मॉनिटरिंग के परिणामस्वरूप, यह सेंटर शिक्षा, संस्कार और संवेदना का संगम बन गया है। यहां भिक्षावृत्ति और बालश्रम से रेस्क्यू किए गए बच्चों को संगीत, योग, खेल और क्रिएटिव लर्निंग के जरिए शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

अब तक प्रशासनिक टीम द्वारा दो चरणों में कुल 82 बच्चों को रेस्क्यू कर विभिन्न स्कूलों में दाखिला दिलाया गया है।

पहले चरण में 51 बच्चों को अलग-अलग विद्यालयों में,

दूसरे चरण में 31 बच्चों को राजकीय प्राथमिक विद्यालय परेड ग्राउंड और साधूराम इंटर कॉलेज में प्रवेश दिलाया गया है।


इन बच्चों के लिए डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से साधूराम इंटर कॉलेज परिसर में आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर का निर्माण कराया जा रहा है, जहां बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक परामर्श, पोषण और व्यक्तिगत विकास की सुविधाएं भी दी जा रही हैं।

3 माह में उल्लेखनीय उपलब्धि:
जुलाई से सितंबर 2025 तक जिला प्रशासन द्वारा 136 बच्चों को देखभाल एवं संरक्षण हेतु बाल संरक्षण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिनमें से 138 बच्चों को मुक्त कर शिक्षा से जोड़ा गया।
भिक्षावृत्ति में संलिप्त 70 बच्चों और बालश्रम में 14 बच्चों को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया, जबकि अन्य राज्यों के 6 बच्चों को उनके परिजनों के पास सुरक्षित भेजा गया।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने कहा:

“हमारा उद्देश्य केवल बच्चों को भिक्षावृत्ति या बालश्रम से मुक्त कराना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और शिक्षित नागरिक बनाना है। आधुनिक इंटेंसिव केयर सेंटर इसी दिशा में एक सशक्त कदम है।”


यह पहल सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का आंदोलन है — जो देवभूमि उत्तराखंड को ‘शिक्षा से जीवन उत्थान’ की वास्तविक मिसाल बना रहा है।