आपदा प्रभावितों के मकान निर्माण पर रोक से बढ़ी परेशानी —

आपदा प्रभावितों के मकान निर्माण पर रोक से बढ़ी परेशानी —

राजस्व परिषद में लंबित सुनवाई से पीड़ित परिवार बेघर, दो सप्ताह में कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी

विकासनगर .(उत्तराखंड बोल रहा है)। प्राकृतिक आपदा की मार झेल चुके ग्राम जाखन (पोस्ट ऑफिस मदर्सू, बिन्हार) के प्रभावित परिवार अब प्रशासनिक उलझनों के शिकार हो गए हैं। पुनर्वास के तहत आवंटित भूमि पर मकान निर्माण पर रोक लगने से ये परिवार दोबारा संकट में फंस गए हैं। बुधवार को प्रभावित ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी विनोद कुमार को ज्ञापन सौंपकर निर्माण कार्य पर लगी रोक हटाने की मांग की।

ज्ञापन सौंपने वालों में दौलत सिंह पुंडीर, जगत सिंह चंदेल, ग्राम प्रधान पपड़ियान आशीष बिष्ट, वीरेंद्र तोमर, क्षेत्र पंचायत सदस्य आशीष तोमर, चंद्रपाल तोमर, महेन्द्र सिंह, अनिल चंदेल, जगदीश सिंह, विजय चंदेल, रितेश चंदेल और दिव्यांशु आदि शामिल रहे।

आपदा के बाद पुनर्वास की उम्मीद टूटी

ग्रामीणों ने बताया कि 16 अगस्त 2023 को आई भीषण प्राकृतिक आपदा में ग्राम जाखन पूरी तरह तबाह हो गया था। शासन ने 19 प्रभावित परिवारों को ग्राम रूद्रपुर में पुनर्वास हेतु भूमि आवंटित की थी। प्रत्येक परिवार को मकान निर्माण के लिए ₹4.50 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई, जिसमें से ₹2.50 लाख की पहली किश्त जारी भी हो चुकी है।

निर्देशानुसार सभी परिवारों ने मकान निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया था और लगभग 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका था। लेकिन ग्राम सभा रूद्रपुर के कुछ लोगों की आपत्तियों के चलते राजस्व परिषद देहरादून ने 2 फरवरी 2025 को निर्माण कार्य पर स्थगन आदेश जारी कर दिया, जिसके बाद सभी कार्य रुक गए।

राजस्व परिषद में नहीं हो रही सुनवाई, बढ़ी बेघर परिवारों की पीड़ा

ग्रामीणों ने बताया कि स्थगन आदेश जारी हुए 8 महीने से अधिक बीत चुके हैं, लेकिन अब तक मामले की कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके चलते सभी प्रभावित परिवार किराये के मकानों में रहकर आर्थिक और मानसिक परेशानी झेल रहे हैं।

आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि दो सप्ताह के भीतर स्थगन आदेश वापस नहीं लिया गया और निर्माण कार्य पुनः प्रारंभ करने की अनुमति नहीं दी गई, तो वे धरना-प्रदर्शन, भूख हड़ताल और तालाबंदी जैसे आंदोलनों को शुरू करने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।

जनभावना का प्रश्न बना पुनर्वास मुद्दा

आपदा प्रभावितों के पुनर्वास का यह मुद्दा अब जनभावना से जुड़ गया है। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए जल्द समाधान निकालेगा, ताकि प्रभावित परिवार फिर से अपने घरों की छत के नीचे सुरक्षित जीवन जी सकें।