चिन्हीकरण मानकों में ढील देकर ही मनाओ राज्य की रजत जयंती” — जनसंघर्ष मोर्चा
अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी
हजारों आंदोलनकारी अब भी चिन्हीकरण से वंचित — कड़े मानक बने न्याय में बाधक, मूल निवासी सबसे ज्यादा हुए प्रभावित
विकासनगर (उत्तराखंड बोल रहा है)।
राज्य गठन की रजत जयंती मनाने की तैयारियों के बीच जनसंघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने सरकार पर करारा प्रहार किया है। पत्रकार वार्ता में नेगी ने कहा कि सरकार रजत जयंती मनाने की तैयारी तो कर रही है, मगर राज्य गठन का असली उद्देश्य अब भी अधूरा है। जिन्होंने राज्य आंदोलन की नींव रखी, वही आंदोलनकारी आज चिन्हीकरण के कठोर मानकों की वजह से उपेक्षा के शिकार हैं।

नेगी ने कहा कि सरकार ने चिन्हीकरण के लिए जो पांच कठोर मानक तय किए हैं—एफआईआर, जेल या गिरफ्तारी प्रमाणपत्र, मेडिकल रिपोर्ट, जिलाधिकारी द्वारा पुष्टिकरण, एलआईयू या पुलिस केस डायरी—वे आम आंदोलनकारियों के लिए असंभव हैं। “कई सच्चे और कर्मठ आंदोलनकारियों ने सड़क से संसद तक संघर्ष किया, लेकिन दस्तावेज़ न होने के कारण आज तक उन्हें चिन्हीकरण नहीं मिला,” उन्होंने कहा।
नेगी ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि “जो व्यक्ति प्रधान बनने की हैसियत नहीं रखता था, वह आज मंत्री या मुख्यमंत्री बना बैठा है। वहीं, काबिल और शिक्षित युवा दस हजार की नौकरी के लिए दर-दर भटक रहा है।” उन्होंने कहा कि 25 वर्षों में प्रदेश में भ्रष्टाचार, दलालतंत्र और अफसरशाही ने शासन को खोखला कर दिया है। राज्य के सपने को चकनाचूर करने का काम इन्हीं नाकाबिल नेताओं ने किया है।
उन्होंने यह भी कहा कि “सबसे ज्यादा नुकसान उत्तराखंड के मूल निवासियों को हुआ है। जिनकी ज़मीनें कभी 10–20 लाख रुपये प्रति बीघा थीं, आज 2–3 करोड़ रुपये में बिक रही हैं, और पहाड़ों से पलायन करने वाले अपने ही लोग इन्हें महंगे दामों में खरीदने को मजबूर हैं।”
नेगी ने सरकार को चेतावनी दी कि अगर चिन्हीकरण मानकों में शीघ्र ढील नहीं दी गई, तो जनसंघर्ष मोर्चा सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगा।
पत्रकार वार्ता में मोर्चा महासचिव आकाश पंवार और विजयराम शर्मा भी मौजूद रहे
🔹 राज्य आंदोलन के सिपाही आज भी पहचान को तरस रहे
🔹 भ्रष्टाचार, माफिया और अफसरशाही ने विकास को निगल लिया
🔹 मूल निवासियों की जमीनें पूंजीपतियों के कब्जे में
