उत्तराखंड बोल रहा है_ देहरादून – रायपुर विकासखंड के ऐतिहासिक केसरवाला गांव (वर्तमान में नगर निगम क्षेत्र) में सेना द्वारा नॉन-जेड-ए भूमि पर कथित रूप से 100–120 वर्षों से जारी कब्जे और ग्रामीणों को सड़क समेत मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखने के मामले में जन संघर्ष मोर्चा ने शासन स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की है।
मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन शुक्रवार को प्रमुख सचिव (मा. मुख्यमंत्री) आर.के. सुधांशु को सौंपा। सुधांशु ने तत्काल सचिव, राजस्व को मामले में कार्रवाई के निर्देश जारी किए।

नेगी के अनुसार, गांव की आबादी को जोड़ने वाली सड़क को सेना अपनी संपत्ति बताती है, जबकि राजस्व अभिलेखों में उक्त भूमि पर सेना का स्वामित्व दर्ज नहीं है। ऐतिहासिक रिकॉर्ड के मुताबिक, वर्ष 1904 में 972.22 एकड़ और वर्ष 1940 में 244.139 एकड़ भूमि सेना ने अधिग्रहित की थी, लेकिन शेष भूमि आज भी किसानों के नाम दर्ज है। इसी शेष भूमि पर कब्जा कर ग्रामीणों को परेशान किया जा रहा है।
नेगी ने यह भी कहा कि सेना के पास इस अधिग्रहण से जुड़े कोई प्रामाणिक दस्तावेज नहीं हैं। यहां तक कि रक्षा संपदा विभाग ने भी 7 जून 2012 को स्पष्ट किया था कि खसरा नंबर 318, 340 और 341 से संबंधित कागजात सेना के पास उपलब्ध नहीं हैं।

इस विवाद पर 24 मई 2024 को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में संबंधित विभागों की बैठक भी हुई थी, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया। ग्रामीणों का कहना है कि सेना को उनकी वर्षों पुरानी पीड़ा को देखते हुए समाधान की दिशा में कदम उठाना चाहिए था, पर अब तक उनकी सुनवाई नहीं हुई।
मोर्चा को उम्मीद है कि शासन स्तर पर हस्तक्षेप से इस लंबे समय से चली आ रही समस्या का स्थायी समाधान निकलेगा और ग्रामीणों को उनकी भूमि एवं बुनियादी सुविधाओं का अधिकार मिलेगा।
