विकासनगर टेंडर घोटाले पर मोर्चा का वार, विजिलेंस जांच को शासन में दी दस्तक

विकासनगर टेंडर घोटाले पर मोर्चा का वार, विजिलेंस जांच को शासन में दी दस्तक
उत्तराखंड बोल रहा है
देहरादून। विकासनगर क्षेत्र के चर्चित टेंडर घोटाले को लेकर एक बार फिर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। जन संघर्ष मोर्चा ने इस मामले में शासन स्तर पर दस्तक देते हुए विजिलेंस जांच की मांग को जोरदार तरीके से उठाया है।


मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने मुख्य सचिव आनंद बर्धन से मुलाकात कर वर्ष 2017-18 में हुए लगभग 2.25 करोड़ रुपये के पीडब्ल्यूडी टेंडर घोटाले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की। मुख्य सचिव ने मामले की गंभीरता को देखते हुए लोक निर्माण विभाग के सचिव को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।


नेगी ने आरोप लगाया कि इस घोटाले में अधिकारियों, ठेकेदारों और एक समाचार एजेंसी की मिलीभगत से सरकार को करीब 60 से 70 लाख रुपये का चूना लगाया गया। उन्होंने कहा कि टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए एक ही दिन में एक ही अखबार के दो अलग-अलग संस्करण प्रकाशित किए गए—एक में टेंडर सूचना दी गई, जबकि दूसरे में उसे गायब रखा गया।


उन्होंने यह भी दावा किया कि टेंडर जानबूझकर छोटे-छोटे हिस्सों में बांटे गए और आधा फीसदी से भी कम दर पर स्वीकृत कर दिए गए, ताकि मनचाहे लोगों को फायदा पहुंचाया जा सके। यदि पारदर्शिता से टेंडर प्रकाशित होते, तो ये 25 से 35 फीसदी तक कम दर पर जा सकते थे।


मोर्चा का कहना है कि इस मामले में पहले भी शासन, मुख्यमंत्री और सूचना आयोग स्तर से जांच के निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन प्रभावशाली लोगों के दबाव में सिर्फ 50,948 रुपये का मामूली जुर्माना लगाकर मामले को दबा दिया गया।


जन संघर्ष मोर्चा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस घोटाले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।