जल विद्युत संपत्तियों के निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मियों का एलान-ए-जंग

जल विद्युत संपत्तियों के निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मियों का एलान-ए-जंग

विकास नगर. डाकपत्थर। (उत्तराखंड बोल रहा है)
जल विद्युत परियोजनाओं के निजीकरण के खिलाफ उत्तराखंड में विद्युत कार्मिकों का विरोध तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में डाकपत्थर मुख्यालय पर उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा की एक महत्वपूर्ण सभा आयोजित की गई, जिसमें सरकार के फैसले के खिलाफ आर–पार की लड़ाई का ऐलान किया गया।


सभा की अध्यक्षता यमुना वैली संयोजक गोपाल बिहारी ने की, जबकि संचालन पंकज सैनी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ऑल इंडिया इंजीनियर्स फेडरेशन के अध्यक्ष इंजीनियर शैलेंद्र दुबे उपस्थित रहे। उनके साथ बिजली कर्मचारी संघ उत्तर प्रदेश के प्रमुख महामंत्री महेंद्र राय, मोर्चा संयोजक इंसारूल हक, मोर्चा अध्यक्ष युद्धवीर सिंह तोमर सहित प्रदेश व अन्य राज्यों से आए अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने राज्य सरकार द्वारा जल विद्युत परियोजनाओं की भूमि एवं संरचनाओं को यूआईआईडीबी के माध्यम से निजी क्षेत्र को सौंपे जाने के निर्णय का कड़ा विरोध किया। वक्ताओं ने इसे सार्वजनिक संपत्ति के निजीकरण की साजिश बताते हुए शासनादेश को तत्काल निरस्त करने की मांग की।
मुख्य वक्ता इंजीनियर शैलेंद्र दुबे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि सरकार ने यह निर्णय वापस नहीं लिया, तो पूरे देश के बिजली इंजीनियर इसके खिलाफ सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि विद्युत परियोजनाओं और पूरी बिजली व्यवस्था का निजीकरण किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि यह जनहित के खिलाफ है।


उन्होंने घोषणा की कि 8 मार्च 2026 को देहरादून में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी तथा मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर शासनादेश निरस्त करने की मांग रखी जाएगी।
महेंद्र राय ने 12 फरवरी 2026 को प्रस्तावित राष्ट्रीयव्यापी आंदोलन में उत्तराखंड के विद्युत कार्मिकों से सक्रिय भागीदारी की अपील की। वहीं मोर्चा संयोजक इंसारूल हक और अध्यक्ष युद्धवीर सिंह तोमर ने कहा कि डाकपत्थर स्थित यमुना परियोजना प्रथम व द्वितीय चरण तथा यमुना कॉलोनी देहरादून की भूमि विशेष रूप से विद्युत उत्पादन के लिए अधिग्रहित की गई थी। इन भूमियों को लेकर जारी शासनादेश भ्रामक तथ्यों पर आधारित है।
उन्होंने सरकार से शीघ्र वार्ता कर समाधान निकालने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि कोई ठोस पहल नहीं हुई तो 6 अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में विद्युत विभाग में हड़ताल की जाएगी। साथ ही भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ने पर किसी भी समय कार्य बहिष्कार किया जा सकता है।
सभा में मोर्चा की 19 सूत्रीय मांगों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित विद्युत संशोधन अधिनियम एवं राष्ट्रीय विद्युत नीति के उन प्रावधानों का भी विरोध किया, जो बिजली क्षेत्र के निजीकरण को बढ़ावा देते हैं।
सभा में व्यापार मंडल, इंटक एवं सीटू ट्रेड यूनियन के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में विद्युत कार्मिक मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में सरकार के फैसले को जनविरोधी बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।