सिंहपुरा–नावघाट पुल कनेक्टिविटी जन संघर्ष मोर्चा के प्रयासों से ही हुई फलीभूत : नेगी
पुल जल्द जनता को होगा समर्पित
कनेक्टिविटी से जुड़ी लगभग सभी औपचारिकताएं पूर्ण
जनप्रतिनिधि सिर्फ श्रेय लेने तक सीमित
विकासनगर। (उत्तराखंड बोल रहा है)
जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने स्पष्ट कहा कि सिंहपुरा (हि.प्र.)–नावघाट, भीमावाला (उत्तराखंड) पुल की कनेक्टिविटी को धरातल तक पहुंचाने का श्रेय यदि किसी को जाता है, तो वह सिर्फ और सिर्फ जन संघर्ष मोर्चा है। अन्य तथाकथित जिम्मेदार जनप्रतिनिधि केवल बयानबाजी और श्रेय लेने की होड़ में लगे रहे।
नेगी ने बताया कि उक्त पुल लगभग दो वर्षों से बनकर पूरी तरह तैयार है, लेकिन कनेक्टिविटी के अभाव में जनता को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा था। इस गंभीर मुद्दे को जन संघर्ष मोर्चा ने लगातार शासन-प्रशासन के समक्ष उठाया।
मोर्चा द्वारा 28 अक्टूबर 2024 को उत्तराखंड के मुख्य सचिव से पुल कनेक्टिविटी को लेकर आग्रह किया गया, जिसके परिणामस्वरूप लोक निर्माण विभाग, उत्तराखंड शासन ने 4 दिसंबर 2024 को हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण विभाग को पत्र प्रेषित कर आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया।
इसके बाद मोर्चा ने 17 जुलाई 2025 को पुनः मुख्य सचिव श्री आनंद बर्धन से शीघ्र कार्रवाई की मांग की। इस पर मुख्य सचिव उत्तराखंड द्वारा हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव श्री प्रबोध सक्सेना से सीधे वार्ता कर 21 जुलाई 2025 को पत्राचार किया गया। इसके सकारात्मक परिणाम स्वरूप 30 अगस्त 2025 को हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव ने अवगत कराया कि एसआईए (सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट) रिपोर्ट को स्वीकृति मिल चुकी है तथा शीघ्र ही प्राइवेट भूमि सरकार के नाम ट्रांसफर कर दी जाएगी।
नेगी ने यह भी बताया कि इस पुल के निर्माण हेतु शासनादेश संख्या 2501/2015 दिनांक 18 अप्रैल 2015 के तहत 1.42 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई थी।
जन संघर्ष मोर्चा ने जनप्रतिनिधियों को आगाह करते हुए कहा कि जनता को बरगलाना बंद करें और धरातल पर कार्य करें। मोर्चा की पहचान केवल नारों से नहीं, बल्कि जमीनी संघर्ष और ठोस परिणामों से होती है, जिसके प्रमाण समय-समय पर जनता के समक्ष प्रस्तुत किए जाते रहे हैं।
