महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती और शिवरात्रि पर्व का शुभारंभ, वैदिक यज्ञ और भजनों से गुंजायमान हुआ आर्य समाज मंदिर विकासनगर

महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती और शिवरात्रि पर्व का शुभारंभ, वैदिक यज्ञ और भजनों से गुंजायमान हुआ आर्य समाज मंदिर विकासनगर

विकासनगर। (उत्तराखंड बोल रहा है) आर्य समाज मंदिर विकासनगर में गुरुवार को महर्षि दयानंद सरस्वती जी के 202वें जन्मोत्सव एवं शिवरात्रि पर्व का विधिवत शुभारंभ श्रद्धा और वैदिक परंपराओं के साथ किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ पंडित चंदन शास्त्री के निर्देशन में वैदिक यज्ञ से हुआ, जिसमें वेदों की ऋचाओं के पवित्र मंत्रों के साथ आहुतियां अर्पित की गईं।
इस अवसर पर श्री रोहित रोहिला आकृति सपरिवार यजमान बने। वेदों के स्वस्तिवाचन मंत्रों का पाठ किया गया तथा यज्ञ प्रार्थना के उपरांत पुष्पवर्षा कर श्रद्धालुओं को आशीर्वचन प्रदान किए गए।


कार्यक्रम में वैदिक कन्या गुरुकुल दबथला, मेरठ (उत्तर प्रदेश) से पधारे वैदिक प्रवक्ता आचार्य प्रमोद जी के साथ ब्रह्मचारिणी हिमांशी आर्या, उज्ज्वल आर्या, श्री आर्या एवं रश्मि आर्या ने “दाता तेरे सिमरन का वरदान जो मिल जाए…” सहित अनेक भजनों की मनमोहक प्रस्तुति दी, जिससे वातावरण भक्तिमय हो उठा।
आचार्य प्रमोद जी ने ईश्वर स्तुति, संध्या उपासना और वैदिक जीवन पद्धति की विस्तृत विवेचना करते हुए कहा कि प्रत्येक मनुष्य को ईश्वर से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—इन चार पुरुषार्थों की प्राप्ति की कामना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भोजन, आहार, निद्रा और संतान उत्पत्ति जैसे गुण मानव और पशु-पक्षियों में समान हैं, किंतु मनुष्य का जन्म उसकी बुद्धि और विवेक के कारण श्रेष्ठ है। वेदों का संदेश उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा—“हे मनुष्यों! सौ हाथों से कमाओ और हजार हाथों से दान करो।”
पंजाब से आए विश्व प्रसिद्ध भजन उपदेशक पंडित जगत वर्मा जी ने “ओम जपो मेरे भाई, ओम जपो मेरी बहना…” तथा “जन्म-जन्म के चक्कर खाकर हीरा जीवन मिलता है…” जैसे प्रेरणादायक भजनों के माध्यम से श्रोताओं को आध्यात्मिक संदेश दिया।
कार्यक्रम का संचालन आर्य उप प्रतिनिधि सभा देहरादून की प्रधान श्रीमती सोनिका वालिया ने किया। इस अवसर पर मंत्री दीपक बंसल, कोषाध्यक्ष विवेक कुमार, हरि किशोर महेंद्रू सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
आयोजकों ने बताया कि यह धार्मिक कार्यक्रम शुक्रवार और शनिवार को भी जारी रहेगा तथा 14 फरवरी को पूर्णाहुति के साथ इसका समापन किया जाएगा।