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भारतीय संस्कृति और संस्कारों की पाठशाला बना आर्य समाज मंदिर, यज्ञ-हवन के साथ संस्कारशाला का शुभारंभ
(उत्तराखंड बोल रहा है)
विकासनगर में भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और चरित्र निर्माण को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से आर्य समाज मंदिर में रविवार को वैदिक मंत्रोच्चारण और यज्ञ-हवन के साथ निःशुल्क संस्कारशाला का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बच्चों, अभिभावकों और समाजसेवियों ने भाग लिया।
आर्य समाज द्वारा पिछले कई वर्षों से आयोजित की जा रही इस संस्कारशाला का उद्देश्य बच्चों को भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपराओं और नैतिक मूल्यों से जोड़ना है। आधुनिक दौर में मोबाइल और पुस्तकों से दूर होती नई पीढ़ी को सकारात्मक दिशा देने के लिए यह पहल समाज में सराहना का विषय बनी हुई है।

संस्कारशाला में बच्चों को कला, शिल्प, योग, खेल, नृत्य, देशभक्ति आधारित नाटक, कविताएं और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर मिलेगा। छुट्टियों के दौरान बच्चों के खाली समय का सदुपयोग हो सके, इसके लिए विशेष रूप से यह शिविर आयोजित किया गया है।
आर्य उपप्रतिनिधि सभा जिला देहरादून की प्रधाना सोनिका वालिया ने बताया कि संस्कारशाला पूरी तरह निःशुल्क है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चे भी इसमें भाग लेकर लाभ उठा सकें। उन्होंने कहा कि बच्चों को सत्य सनातन वैदिक धर्म, सामाजिक जिम्मेदारी और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रम भी कराए जाएंगे।
उन्होंने नगरवासियों से अपील की कि वे अधिक से अधिक बच्चों को इस संस्कारशाला से जोड़ें, ताकि आने वाली पीढ़ी संस्कारवान, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बन सके।
विशेष बात यह है कि विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ प्रशिक्षक बिना किसी लाभ के अपनी सेवाएं देकर बच्चों को प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। यह संस्कारशाला 31 मई तक संचालित होगी और इसमें विकासनगर क्षेत्र के अनेक बालक-बालिकाएं प्रतिभाग कर रहे हैं।
