चकराता वन प्रभाग में धधकी आग, वन कर्मियों ने बचाए 173 हेक्टेयर से अधिक जंगल

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चकराता वन प्रभाग में धधकी आग, वन कर्मियों ने बचाए 173 हेक्टेयर से अधिक जंगल
(उत्तराखंड बोल रहा है)
तेज हवाओं और कठिन हालात के बीच 50 कर्मियों ने मोर्चा संभालकर टाला बड़ा नुकसान

देहरादून/चकराता। चकराता वन प्रभाग की देवघर रेंज में 27 मई 2026 को लगी भीषण वनाग्नि ने कुछ समय के लिए वन विभाग की चिंता बढ़ा दी, लेकिन वन कर्मियों की तत्परता, साहस और लगातार प्रयासों से एक बड़ा वन क्षेत्र जलने से बच गया। आग की तीन अलग-अलग घटनाओं के बावजूद विभाग ने समय रहते हालात पर काबू पाकर 173.4 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र को सुरक्षित बचा लिया।


जानकारी के अनुसार आग सबसे पहले जरासू पानी के सिविल क्षेत्र में भड़की, जिसके बाद लपटें आरक्षित वन क्षेत्रों संग्रेड-2, मझोग-5 और मझोग-6A तक पहुंच गईं। शुरुआती दो स्थानों पर वन विभाग की टीमों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आग पर जल्द नियंत्रण पा लिया, लेकिन मझोग क्षेत्र में तेज हवाओं के चलते हालात काफी चुनौतीपूर्ण हो गए।
तेज हवा के कारण आग तेजी से फैल रही थी और वन कर्मियों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद टीमों ने हिम्मत नहीं हारी और घंटों की मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया।


वन विभाग के अनुसार मझोग-5 क्षेत्र में लगभग 107 हेक्टेयर वन क्षेत्र को आग की चपेट में आने से बचाया गया, जबकि मझोग-6A में 2 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ, लेकिन वहां भी 147 हेक्टेयर जंगल सुरक्षित बचा लिया गया।
आग बुझाने और राहत कार्य में देवघर और मोल्टा रेंज के करीब 50 फील्ड कर्मियों ने दिन-रात मेहनत की। अग्निशमन विभाग सहित अन्य विभागों का भी सहयोग लिया गया, जिससे आग पर समय रहते नियंत्रण संभव हो सका।


वन विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मझोग और संग्रेड की घटनाओं में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस जांच में जुट गई है और आग लगाने वालों की तलाश की जा रही है।
वन विभाग ने साफ चेतावनी दी है कि जंगलों में आग लगाने वाले किसी भी शरारती तत्व को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।