सीलिंग भूमि के नाम पर उत्पीड़न के खिलाफ तहसील में गरजा जन संघर्ष मोर्चा

उत्तराखंड बोल रहा है हर खबर सच के संग

सीलिंग भूमि के नाम पर उत्पीड़न के खिलाफ तहसील में गरजा जन संघर्ष मोर्चा
(उत्तराखंड बोल रहा है)
रघुनाथ नेगी बोले—1975 से पहले खरीदी जमीन पर रोक लगाना सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भावना के विपरीत, पहले हो अभिलेखों की जांच
विकासनगर। सीलिंग भूमि के नाम पर आम लोगों को परेशान किए जाने के आरोपों को लेकर जन संघर्ष मोर्चा ने शुक्रवार को विकासनगर तहसील में जोरदार प्रदर्शन किया। मोर्चा कार्यकर्ताओं ने अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी के नेतृत्व में तहसील का घेराव करते हुए प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई और जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन मुख्य प्रशासनिक अधिकारी श्री रयाल को सौंपा।


प्रदर्शन के दौरान रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि देहरादून जिले के कई क्षेत्रों में चाय बागान और सीलिंग भूमि के नाम पर भवन स्वामियों एवं काश्तकारों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा भूमि की वास्तविक कानूनी स्थिति और पुराने दस्तावेजों की पड़ताल किए बिना ऐसे आदेश लागू किए जा रहे हैं, जिससे बड़ी संख्या में आम लोग प्रभावित हो रहे हैं।
नेगी ने कहा कि सीलिंग भूमि के मामले में सुप्रीम कोर्ट के सिविल अपील संख्या 2697/1984 में 24 अक्टूबर 1996 को दिए गए निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि 10 अक्टूबर 1975 से पहले खरीदी गई भूमि को उत्तर प्रदेश सीलिंग कानून की धारा 6(3) के तहत सीलिंग से बाहर माना गया है। इसके बावजूद, मोर्चे का आरोप है कि जिला प्रशासन की ओर से वर्ष 2023 में जारी निर्देशों के बाद कई क्षेत्रों में भूमि के क्रय-विक्रय और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया प्रभावित हुई है।


उन्होंने कहा कि एनफील्ड ग्रांट, जमनीपुर, एटनबाग, ईस्ट होप टाउन, बदामावाला, अंबाड़ी, रायपुर, जीवनगढ़, कंडोली, कांवली, हरबंसवाला, मोहकमपुर खुर्द, बंजारावाला माफी, आर्केडिया ग्रांट, मलूकावाला, मिट्ठी बेहेड़ी, लाडपुर और नत्थनपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को इसका सामना करना पड़ रहा है।


मोर्चा अध्यक्ष ने कहा कि यदि किसी भूमि का संबंध वास्तव में सीलिंग कानून से है तो प्रशासन को संबंधित अभिलेखों, पुराने बैनामों, स्वामित्व और खरीद की तारीख की विधिवत जांच करनी चाहिए। केवल किसी भूमि को सीलिंग से जुड़ा मानकर सभी मामलों में रोक लगा देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में मूल भूस्वामी द्वारा 10 अक्टूबर 1975 से पहले भूमि बेचे जाने के बाद आगे हुए लेन-देन की कानूनी स्थिति भी अलग हो सकती है, इसलिए प्रत्येक मामले की दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग जांच जरूरी है।


नेगी ने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था से आम जनता के साथ-साथ अधिवक्ताओं को भी परेशानी उठानी पड़ रही है और भूमि संबंधी कामकाज प्रभावित होने से सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि सीलिंग भूमि से जुड़े सभी मामलों की तथ्यात्मक और दस्तावेजी जांच कर पात्र लोगों को राहत दी जाए तथा बिना जांचे किसी भी भूमि के क्रय-विक्रय और दाखिल-खारिज पर रोक न लगाई जाए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने शीघ्र समस्या का समाधान नहीं किया तो मोर्चा आंदोलन को और व्यापक करेगा।


प्रदर्शन में मोर्चा महासचिव आकाश पंवार, विजय राम शर्मा, दिलबाग सिंह, मोहम्मद आरिफ, गालिब प्रधान, विवेक गुप्ता, मुजीबुर रहमान सलीम, राम सिंह तोमर, केसी चंदेल, मालती देवी, विनोद पड्डा, हाजी असद, युवराज तोमर, संजय गुप्ता, सत्यपाल शर्मा, प्रवीण शर्मा पिन्नी, मो. नसीम, राजकुमार गोयल, रितेश तोमर, मो. इस्लाम, मो. आसिफ, सलीम खान, राजीव गुप्ता, वाहिद कुरैशी, मुमताज, राघवेंद्र सिंह, संगीता पैन्युली, मान चंद राणा, दीपक अग्रवाल, प्रमोद शर्मा, ब्लॉक अध्यक्ष भीम सिंह बिष्ट, मनीष गुप्ता, नीलम अंथवाल, मुकेश रोहिला, फरजाना, अशोक गुप्ता, महेंद्र भंडारी, सुरेशानंद बेलवाल, यूनुस, उमराव सिंह, बिल्लू गिल्बर्ट, विनोद शर्मा, नरेश ठाकुर, जगदीश रावत, साक्षी सैनी, पूजा नौटियाल, हिमांशु थापा, हरीश शाह, नाहिद खान, सफीक पांडे, मीडिया प्रभारी अतुल हांडा सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे