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कानून व्यवस्था पर मोर्चा का बड़ा प्रहार, जनहित में आवाज बुलंद कर सरकार से कार्रवाई की मांग
विकासनगर। (उत्तराखंड बोल रहा है)
प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर जन संघर्ष मोर्चा ने एक बार फिर जनहित की आवाज बुलंद की है। मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने पत्रकार वार्ता में प्रदेश की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि उत्तराखंड में कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त होती जा रही है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
नेगी ने आरोप लगाया कि एडीजी, लॉ एंड ऑर्डर श्री मुरुगेशन की लापरवाह एवं निष्क्रिय कार्यशैली के कारण प्रदेश में माफियाओं, बदमाशों और अवैध कारोबारियों का साम्राज्य स्थापित हो गया है। आज हालात यह हैं कि जनता बदमाशों से ज्यादा पुलिसिया आतंक से डर रही है। कई स्थानों पर पुलिसिया लूट-खसोट आम बात हो गई है, जिससे लोग मानसिक रूप से टूट रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्यशैली से तंग आकर कुछ लोग आत्महत्या जैसा कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी केवल “ऑफिस की शोभा बढ़ाने” तक सीमित हैं। प्रदेश में दिन-दहाड़े अपराध हो रहे हैं, बदमाश बेखौफ वारदातों को अंजाम दे रहे हैं और इस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं दिख रहा।
रघुनाथ सिंह नेगी ने हाल ही में एक किसान आत्महत्या प्रकरण से जुड़े निलंबित दरोगा की एसीआर लीक होने का मामला उठाते हुए सवाल किया कि इसकी जिम्मेदारी किसकी है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों का कर्तव्य है कि वे समय-समय पर आम जनता से सीधा संवाद करें, ताकि जमीनी हकीकत सामने आ सके और लोग खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।
उन्होंने यह भी चिंता जताई कि अधिकांश जनपदों में जानलेवा चाइनीस मांझा खुलेआम बिक रहा है और नशे का कारोबार लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इन गंभीर मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। हालांकि नेगी ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश में कई कर्मठ और ईमानदार पुलिस अधिकारी पूरी निष्ठा से अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं, लेकिन उन्हें न तो संरक्षण मिल रहा है और न ही प्रोत्साहन।
मोर्चा अध्यक्ष ने ऐलान किया कि जन संघर्ष मोर्चा शीघ्र ही सरकार से वार्ता कर ऐसे गैर-जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की मांग करेगा और जब तक जनता को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
तंज कसते हुए नेगी ने कहा—
“ऐसे अधिकारियों को एडीजी, लॉ एंड ऑर्डर नहीं बल्कि एडीजी, वीआईपी ट्रीटमेंट बनाया जाना चाहिए।”
पत्रकार वार्ता में हाजी असद एवं प्रवीण शर्मा ‘पिन्नी’ भी मौजूद रहे।
यह वार्ता इस बात का संकेत है कि जनहित की आवाज अब और तेज होगी और कानून व्यवस्था को लेकर सरकार पर जवाबदेही तय करने का दबाव बढ़ेगा।
