मोर्चा की दस्तक से हिला तंत्र, पॉलिटेक्निक प्रवक्ता भर्ती को लेकर शासन में बढ़ी हलचल

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मोर्चा की दस्तक से हिला तंत्र, पॉलिटेक्निक प्रवक्ता भर्ती को लेकर शासन में बढ़ी हलचल
(उत्तराखंड बोल रहा है)
200 से अधिक पदों पर भर्ती की मांग ने पकड़ा जोर, तकनीकी शिक्षा मंत्री और अफसर हरकत में
देहरादून। प्रदेश के राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेजों में वर्षों से खाली पड़े प्रवक्ताओं के पदों को लेकर जन संघर्ष मोर्चा ने एक बार फिर सरकार और शासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने भर्ती प्रक्रिया को तत्काल शुरू कराने के लिए तकनीकी शिक्षा सचिव से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और मामले में प्रभावी पैरवी की मांग उठाई।
मोर्चा की इस पहल के बाद शासन स्तर पर हलचल तेज हो गई। सूत्रों के अनुसार, मामला सामने आते ही तकनीकी शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने भी अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसे मोर्चा के दबाव और लगातार उठाई जा रही आवाज का असर माना जा रहा है।
नेगी ने कहा कि प्रदेश के पॉलिटेक्निक संस्थानों में 200 से अधिक प्रवक्ताओं के पद खाली पड़े हैं, जिनमें सिविल इंजीनियरिंग के लगभग 81, इलेक्ट्रिकल के 54, मैकेनिकल के 52 तथा फार्मेसी के 39 पद शामिल हैं। इन पदों पर भर्ती न होने से न केवल तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि हजारों युवाओं के रोजगार के अवसर भी अधर में लटके हुए हैं।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में सरकार ने इन पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था और योग्यता संबंधित विषय में बीटेक निर्धारित की गई थी। मार्च 2025 में परीक्षा आयोजित होनी थी, लेकिन मामला न्यायालय पहुंच गया। उच्च न्यायालय ने एआईसीटीई के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि प्रवक्ता पद के लिए एम.टेक योग्यता आवश्यक है और सरकार को संशोधित विज्ञप्ति जारी कर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे।
नेगी ने आरोप लगाया कि न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद एक वर्ष से अधिक समय बीत गया, लेकिन सरकार न तो नई भर्ती प्रक्रिया शुरू कर सकी और न ही न्यायालय में प्रभावी पैरवी कर पाई। परिणामस्वरूप तकनीकी शिक्षा व्यवस्था पर संकट गहराता जा रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि जल्द ही वर्तमान में कार्यरत कई प्रवक्ताओं की पदोन्नति प्रस्तावित है। यदि नई भर्ती नहीं हुई तो अनेक संस्थानों में शिक्षण व्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है और विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लग जाएगा।
मोर्चा ने सरकार से मांग की है कि युवाओं और तकनीकी शिक्षा के हित में भर्ती प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जाए, ताकि वर्षों से इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को न्याय मिल सके।
इस अवसर पर मोर्चा प्रतिनिधिमंडल में भीम सिंह बिष्ट भी मौजूद रहे।
“जनता के रघुनाथ”
खाली पदों पर भर्ती नहीं, तो तकनीकी शिक्षा का भविष्य कैसे सुरक्षित होगा? यही सवाल अब जन संघर्ष मोर्चा सरकार से पूछ रहा है।