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“विधायकों को कम वेतन और ज्यादा पेंशन, तो कर्मचारियों को क्यों नहीं?” — जन संघर्ष मोर्चा ने सरकार से पूछा बड़ा सवाल
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विकासनगर। प्रदेश में कर्मचारियों, किसानों और आम जनता के आर्थिक संकट के बीच विधायकों को मिलने वाले वेतन, भत्तों और आजीवन सुविधाओं को लेकर ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यदि विधायकों के लिए “कम वेतन और ज्यादा पेंशन” का फार्मूला लागू हो सकता है, तो यही व्यवस्था सरकारी कर्मचारियों के लिए भी लागू की जानी चाहिए।

जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं पूर्व उपाध्यक्ष, , रघुनाथ सिंह नेगी ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि यह दुनिया का शायद सबसे विचित्र उदाहरण है कि एक विधायक को कार्यकाल के दौरान लगभग 50 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है, जबकि कार्यकाल समाप्त होने या सेवानिवृत्ति के बाद उसे 60 हजार रुपये मासिक पेंशन का प्रावधान है।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में विधायकों को वेतन के अतिरिक्त निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, जनसेवा कार्य भत्ता, डीजल-पेट्रोल खर्च तथा स्टाफ मद में भी भारी राशि उपलब्ध कराई जाती है। वहीं पूर्व विधायकों को पेंशन के साथ अतिरिक्त भत्तों और आजीवन स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ भी मिलता है।

नेगी ने सवाल उठाया कि जब प्रदेश की आर्थिक स्थिति लगातार दबाव में है और सरकार संसाधनों की कमी का हवाला देती है, तब आखिर किस आधार पर विधायकों को इतनी व्यापक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि क्या विधायक सरकारी सेवक हैं, या फिर वे उन कर्मचारियों और सुरक्षाबलों से अधिक योगदान दे रहे हैं जो अपना पूरा जीवन सेवा में समर्पित कर देते हैं।
उन्होंने कहा कि एक सरकारी कर्मचारी 30 से 35 वर्ष तक नौकरी करने के बावजूद आज पेंशन जैसी मूलभूत सामाजिक सुरक्षा से वंचित है, जबकि कुछ वर्षों के लिए विधायक बनने वालों को आजीवन पेंशन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। यह व्यवस्था कर्मचारियों और आम जनता के साथ अन्याय है।
जन संघर्ष मोर्चा ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि यदि विधायकों के लिए “वेतन कम और पेंशन ज्यादा” वाली व्यवस्था उचित मानी जाती है, तो यही फार्मूला कर्मचारियों के लिए भी लागू किया जाना चाहिए। मोर्चा का कहना है कि प्रदेश का कर्मचारी, किसान और आम नागरिक आर्थिक दबाव में कराह रहा है, लेकिन सत्ता में बैठे जनप्रतिनिधियों को उनकी पीड़ा सुनाई नहीं दे रही।
