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सरकारी अस्पताल बने रेफरल सेंटर, गर्भवती महिलाओं की मौतों पर कौन जिम्मेदार?” — नेगी का सरकार और राजभवन पर बड़ा हमला
(उत्तराखंड बोल रहा है)
विकासनगर। जन संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष एवं जीएनवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर सरकार और राजभवन पर तीखा हमला बोला है। पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में गर्भवती महिलाओं को समय पर समुचित इलाज न मिलने के कारण लगातार मौतें हो रही हैं और कई मामलों में भ्रूण जन्म लेने से पहले ही कोख में दम तोड़ रहे हैं, जो बेहद दर्दनाक और शर्मनाक स्थिति है।
नेगी ने कहा कि प्रदेश के सरकारी अस्पताल आज इलाज के केंद्र नहीं बल्कि सिर्फ रेफरल सेंटर बनकर रह गए हैं। कहीं डॉक्टरों की भारी कमी है तो कहीं पैरामेडिकल स्टाफ नहीं है। कई अस्पतालों में सिर्फ इमारतें चमक रही हैं, लेकिन मरीजों को उपचार नहीं मिल पा रहा। आमजन इलाज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
उन्होंने इन घटनाओं के लिए सीधे तौर पर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत और राज्यपाल गुरमीत सिंह को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यह केवल मौतें नहीं बल्कि व्यवस्था की घोर लापरवाही का परिणाम हैं। इतने गंभीर मामलों पर राजभवन द्वारा संज्ञान न लेना भी बेहद गैर-जिम्मेदाराना है।
नेगी ने सवाल उठाया कि आखिर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री इन गंभीर मुद्दों से बेखबर क्यों बने हुए हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि अधिकारी उनकी बात ही नहीं सुन रहे। पिछले पांच–सात महीनों में जिस तरह प्रसूता महिलाओं की मौतें हुई हैं और बीमार लोगों को इलाज न मिलने के कारण असमय काल का ग्रास बनना पड़ा है, उससे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत सामने आ गई है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के राज्यपाल सिर्फ भाषणों में व्यस्त हैं, जबकि जनता इलाज के लिए भटक रही है। नेगी ने मांग की कि स्वास्थ्य सेवाओं की इस बदहाली की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए स्वास्थ्य मंत्री और राज्यपाल को इस्तीफा देना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द व्यवस्था नहीं सुधरी तो जन संघर्ष मोर्चा पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर बड़ा आंदोलन छेड़ेगा।
पत्रकार वार्ता में ठाकुर भाग सिंह और मोर्चा अध्यक्ष अमित जैन भी मौजूद रहे।
