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स्वामी श्रद्धानंद तुमको नमन… राष्ट्र रक्षा में समर्पित रहा जीवन
विकासनगर। (उत्तराखंड बोल राह है)
आर्य समाज मंदिर विकासनगर में , मंगलवार को महान शिक्षाविद, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं आर्य समाज के अग्रणी संन्यासी स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान दिवस पर श्रद्धापूर्वक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर पुरोहित चंदन शास्त्री द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ यज्ञ एवं स्वस्तिवाचन का पाठ किया गया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद जी ने अपना सम्पूर्ण जीवन स्वाधीनता, स्वराज्य, शिक्षा तथा वैदिक धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया। वे स्वामी दयानन्द सरस्वती की शिक्षाओं के प्रमुख प्रचारक रहे। उन्होंने गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय सहित अनेक शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना कर राष्ट्र को शिक्षित एवं संगठित करने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। सामाजिक सुधार के क्षेत्र में उन्होंने अछूतोद्धार एवं शुद्धि आन्दोलन के माध्यम से समाज को एकसूत्र में बांधने का कार्य किया।
वक्ताओं ने स्मरण कराया कि वर्ष 1922 में अमृतसर के ‘गुरु के बाग सत्याग्रह’ के दौरान सिखों के धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए स्वामी श्रद्धानंद जी ने प्रभावशाली भूमिका निभाई, जिसके कारण ब्रिटिश सरकार ने उन्हें गिरफ्तार भी किया। अंततः 23 दिसंबर 1926 को उन्होंने राष्ट्रसेवा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
इस अवसर पर गुरु गोविंद सिंह जी एवं उनके साहिबजादों के अद्वितीय बलिदान को भी श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया तथा देश के लिए प्राण अर्पित करने वाले अनगिनत बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में डॉ. प्रवेश गुप्ता, रमन डंग, ईश्वर महेंदिता एवं पुष्पा चुग ने देशप्रेम और भक्ति रस से ओत-प्रोत भजन प्रस्तुत कर वातावरण को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम में आर्य उप प्रतिनिधि सभा की जिला प्रधान श्रीमती सोनिका वालिया, आर्य समाज विकासनगर के प्रधान नरेंद्र वर्मा, कोषाध्यक्ष विवेक कुमार, जितेन्द्र कौशिक, सतेंद्र सैनी, विजेंदर सैनी, विनय सैनी, आयुष्मान अहलूवालिया, विजय वर्मा, जेनू वालिया, अनुजा वर्मा, सुषमा तोमर, रेनू रानी, नंदिनी गुप्ता सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन स्वामी श्रद्धानंद जी को कोटि-कोटि नमन के साथ किया गया।
