बढ़ते बिजली के दामों पर सरकार विफल, जनता पर महंगाई का दोहरा बोझ : जन संघर्ष मोर्चा

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बढ़ते बिजली के दामों पर सरकार विफल, जनता पर महंगाई का दोहरा बोझ : जन संघर्ष मोर्चा

विकासनगर। (उत्तराखंड बोल रहा है)
प्रदेश में लगातार बढ़ते बिजली के दामों और अतिरिक्त चार्जेस को लेकर जन संघर्ष मोर्चा ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने पत्रकार वार्ता में कहा कि बिजली दरों में हो रही बेहताशा बढ़ोतरी पर रोक लगाने के लिए सरकार के पास कोई ठोस नीति नहीं है, जिसका सीधा खामियाजा आम उपभोक्ता भुगत रहा है।
नेगी ने कहा कि सरकार की नाकामी अब इस हद तक पहुंच चुकी है कि जनता की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर मुद्दे पर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस भी मुखर होकर बोलने से कतरा रहा है, मानो उसे इस मामले में “सांप सूंघ गया हो।”
उन्होंने बताया कि ऊर्जा प्रदेश होने के बावजूद सरकार ने बिजली की दरें इस प्रकार तय की हैं कि आम आदमी कंगाल होता जा रहा है। वर्तमान में 100 यूनिट तक ₹3.65 प्रति यूनिट, 101 से 200 यूनिट तक ₹5.25, 201 से 400 यूनिट तक ₹7.15 और 401 यूनिट से ऊपर ₹7.80 प्रति यूनिट वसूला जा रहा है। इसके अलावा एएसडी, टीसीएस, एरियर और फिक्स्ड चार्जेस के नाम पर अतिरिक्त बोझ डालकर जनता से जजिया कर वसूला जा रहा है


नेगी ने कहा कि प्रदेश का आम नागरिक पहले ही महंगाई से जूझ रहा है। कारोबार ठप हो चुके हैं और छोटी-मोटी नौकरियों से परिवार चलाने वाले लोग अपनी पीड़ा किसे सुनाएं, यह सबसे बड़ा सवाल है।
उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रतिवर्ष लगभग 15 प्रतिशत लाइन लॉस के कारण बिजली बर्बाद हो रही है, जिसकी कीमत 1000 से 1500 करोड़ रुपये के आसपास बैठती है। इस भारी नुकसान को रोकने में सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है, लेकिन इस विफलता की सजा उपभोक्ताओं को दी जा रही है।
नेगी ने याद दिलाया कि कुछ माह पूर्व ही 100 यूनिट तक ₹3.40, 200 यूनिट तक ₹4.90, 200 से 400 यूनिट तक ₹6.70 और इससे ऊपर ₹7.35 प्रति यूनिट की दरें निर्धारित थीं। साथ ही फिक्स्ड चार्जेस भी 75, 85 और 100 रुपये प्रति किलोवाट प्रतिमाह लगाए गए थे। इसके बावजूद बार-बार दरों में बढ़ोतरी कर सरकार ने लूट के नए स्तंभ खड़े कर दिए हैं।
उन्होंने सवाल किया कि जब लाइन लॉस रोकना सरकार की जिम्मेदारी है तो उसकी नाकामी का दंड उपभोक्ता क्यों भुगते? सरकार रोकथाम के उपायों पर काम क्यों नहीं कर रही?
पत्रकार वार्ता में आकाश पंवार और पछवादून अध्यक्ष अमित जैन भी मौजूद रहे।
जन संघर्ष मोर्चा ने सरकार से मांग की है कि बढ़ते बिजली के दामों पर तत्काल अंकुश लगाया जाए और आम जनता को वास्तविक राहत दी जाए, अन्यथा आंदोलन तेज किया