कैशलेस इलाज के  लिए कार्मिकों की पीड़ा को लेकर     मोर्चा का शंखनाद, नेगी ने संभाली कमान”

कैशलेस इलाज के लिए कार्मिकों की पीड़ा को लेकर मोर्चा का शंखनाद, नेगी ने संभाली कमान”

कार्मिकों की पीड़ा को लेकर रघुनाथ नेगी ने शासन में दी दमदार , दस्तक
गोल्डन कार्ड धारकों के कैशलेस इलाज के लिए मोर्चा का निर्णायक अभियान तेज
उत्तराखंड बोल रहा है
देहरादून। प्रदेश के हजारों कार्मिकों और पेंशनर्स की आवाज बनकर जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी एक बार फिर मजबूती से सामने आए। गोल्डन कार्ड के जरिए कैशलेस इलाज की गंभीर समस्या को लेकर नेगी ने स्वास्थ्य सचिव श्री सचिन कुर्वे से मुलाकात कर शासन स्तर पर ठोस कार्रवाई की मांग उठाई।
मुलाकात के दौरान स्वास्थ्य सचिव ने आश्वस्त किया कि कर्मचारियों को राहत देने के लिए बहुत जल्द कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा, जिसमें केवल वन टाइम कटौती का प्रावधान होगा, ताकि कार्मिकों को बार-बार आर्थिक बोझ न झेलना पड़े।
रघुनाथ सिंह नेगी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गोल्डन कार्ड की विसंगतियों और प्रशासनिक लापरवाही के चलते अधिकांश सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस इलाज नहीं मिल पा रहा है। इसका सबसे अधिक खामियाजा पेंशनर्स और निगमों के उन कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है जिन्हें पेंशन का सहारा भी नहीं है।
उन्होंने बताया कि कई बुजुर्ग पेंशनर्स इलाज के लिए संसाधन तक नहीं जुटा पा रहे हैं और मजबूरी में रिश्तेदारों व मित्रों से उधार या ब्याज पर कर्ज लेकर उपचार करा रहे हैं। यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक और संवेदनहीन व्यवस्था का परिचायक है।
नेगी ने जोर देकर कहा कि छोटी बीमारियों में तो कर्मचारी किसी तरह व्यवस्था कर लेते हैं, लेकिन हृदय रोग या अन्य आपात व जटिल परिस्थितियों में धनाभाव के कारण कई बार जीवन पर संकट आ जाता है। ऐसी स्थिति को किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने दो टूक कहा कि मोर्चा कर्मचारियों को उनके हाल पर मरने या तड़पने के लिए नहीं छोड़ सकता। जब तक गोल्डन कार्ड धारकों को पूर्ण रूप से कैशलेस और सम्मानजनक इलाज की सुविधा सुनिश्चित नहीं होती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल में प्रवीण शर्मा ‘पिन्नी’ भी उपस्थित रहे।
स्पष्ट है कि रघुनाथ सिंह नेगी ने कार्मिकों की पीड़ा को शासन तक पहुंचाकर एक बार फिर साबित किया है कि वे सिर्फ नेता नहीं, बल्कि कर्मचारियों के सच्चे हमदर्द और संघर्षशील आवाज हैं।